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पद्मिनी महल -चित्तौड़गढ़ दुर्ग

पद्मिनी महल -चित्तौड़गढ़ दुर्ग
Places to Visit

चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर स्तिथ पद्मिनी महल बेहद ही आकर्षक और बहुचर्चित स्थल है | इस महल का नाम इतिहास प्रसिद्ध राणा रतन सिंह की ख़ूबसूरत पत्नी  रानी पद्मावती के नाम पर ही रखा गया था। यह महल ‘पद्मिनी तालाब’ की उत्‍तरी परिधि पर स्‍थित है। इतिहासकार मानते है कि यही वह स्थान है जहाँ अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी के प्रतिबिम्ब की झलक देखी थी। रानी पदमिनी के सौंदर्य से खिलजी अभिभूत हो गया और उसकी रानी को पाने की इच्छा के कारण ही  अंततः चित्तौड़गढ़ में युद्ध हुआ।पदमिनी महल की वास्तुकला बेजोड़ है और यहाँ के बगीचे में खिले फूल हमेशा पर्यटकों को आकर्षित करते रहते है |

रानी पद्मावती का महल – चित्तौड़गढ़ दुर्ग

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रानी पद्मावती का महल

पद्मिनी महल पानी के बीचों-बीच बना हुआ है। इस महल को ‘ज़नाना महल’ भी कहा जाता है, और इसके किनारे के महल ‘मरदाना महल‘ कहलाते हैं। इतिहासकार बताते है की मरदाना महल से अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी का प्रतिबिंब जल में देखा था वहीं कुछ इतिहासकार लिखते है की मरदाना महल के एक कमरे में लगे दर्पण में रानी पद्मिनी की झलक देखी थी | इस प्रसंग के बारे में कहा जाता है महल में शीशे इस तरह से लगाये गए थे कि यहाँ से झील के मध्य बने ज़नाना महल की सीढ़ियों पर खड़े किसी भी व्यक्ति का स्पष्ट प्रतिबिंब दर्पण में देखा जा सकता है | हालंकियह  विवाद का विषय है और इतिहास में दर्ज इन बातो को कोई सही ठहरता है तो कोई गलत | अभी हाल में रानी पद्मिनी महल पर बन रही फिल्म को लेकर भी यह महल काफी चर्चा में आया और एक संगठन ने महल में कुछ वर्षो पहले लगाए शीशे इस बात के विरोध में तोड़ डाले कि खिलजी ने रानी पद्मिनी  को कांच में देखा था | घटना के बाद से ही इस कमरे को बंद कर  दिया गया |

पद्मिनी महल की सुन्दरता

पद्मिनी महल पानी के बीच बना है | इसके किनारो पर बगीचे और मरदाना महल है | पद्मिनी महल चूकि पानी के बीच है इसलिए इसमें जाना असंभव है लेकिन  मरदाना महल और पद्मिनी पार्क में जाया जा सकता है | कहा जाता है की इन महलो का  महाराणा सज्जन सिंह जी और महाराणा फ़तेह सिंह जी के समय भी जीर्णोधार करवाया गया था | इन महलों की खूबसूरती देखते ही बनती है  | मुख्य द्वार में प्रवेश करने के बाद एक तरफ सैनिको और दूसरी तरफ दासियों के लिए कोठरिया बनी हुई है  | अंदर बगीचे में सुन्दर और रंग बिरंगे गुलाब के फूल सभी का मन मोह लेते है | पद्मिनी महल के चारो तरफ कम गहरा सरोवर है जो पक्षियों की आरामगाह भी है और संभवत उस समय सरोवर में कमल भी खिलते होंगे |

रानी पदमिनी के जौहर और युद्ध की कहानी

रानी पद्मिनी का प्रतिबिम्ब जब अलाउदीन खिलजी ने देखा तो वह रानी पद्मिनी की सुंदरता से ऐसा प्रभावित हुआ कि उसने रानी को पाने के लिए हर एक दांव चलने का मन बना लिया | पहले छल से रतन सिंह को बंदी बनाया लेकिन जब इससे बात नहीं बनी तो वह बौखला गया | इधर चौहान राजपूत सेनापति गोरा और बादल एक चाल खेल महाराजा को मुक्त करवा लाये | इसके बाद जब स्तिथि आर – पार की बनी तो साका और जौहर की तयारी हो गयी | रतन सिंह और उनके सैनिक खिलजी से युद्ध करने मैदान में उतर गए और आन – बान – शान की रक्षा के लिए रानी पद्मिनी ने एक विशाल चिता जला हज़ारो महिलाओं के साथ जौहर कर लिया |

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